💐🍁होली होती है रंगों के संग प्रेमरस में भीगे तन औ' मन। पिचकारी में भरा उन्माद उल्लास में भीगी बौछार । रंग जाए रोम-रोम सारा मिले दुआ की छत्रछाया। पड़े शीर्ष पर केसर जब -जब अपनत्व मिले केवल तब-तब। ✏ अरुण कालिया
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छोटा सा मन
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छोटे से मन में इतनी बातें काग़ज़ कलम लेकर बैठें, नदारद हैं अब सारी बातें। कलम, कर में रख विचारों के बादल उमड़-घुमड़ कर शोर करें, पर सार्थक शब्दों को न ढूँढ सकें। किंकर्तव्य-सा मूढ़ मन नेत्र इत-उत डोल रहे बनते-बिगड़ते विचारों को न तौल सकें। सारे विचार इक दूजे में लिपट अव्यवस्थित से हो रहे. क्रम में प्रथम लगा व्यवस्थित कर बता न डोल इहाँ उहाँ ऊहापोह मन की मिटा. अब लिख न पाउँ जो लिखना चाहूँ, काश! कुछ ऐसा लिख जाउँ शोषण से किसी एक को भी बचा पाउँ, कोई बच्चा न हो शोषण का शिकार न सहे,अत्याचारी का अत्याचार. ध्यान रहे न हो उम्र से पहले कोई बेटी बड़ी, खेले गुड्डे गुड़ियों से, न हो जाए बचपन में बड़ी . अपने हिस्से का सुख भोगे प्रफुल्लित मन-से, रिश्तों को निभा,न उलझे ऊहा-पोह में.
Happy friendship day to all my friends
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दोस्त अन्मोल है लज्जयते च सुहृद् येन , भिद्यते दुर्मना भवेत्। वक्तव्यं न तथा किञ्चिद् विनोदे s पि च धीमता।। अर्थात् अगर आप बुद्धिमान हैं , बड़ी अच्छी बात है , गर्व की बात है परन्तु इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि आप अपनी बुद्धिमानी से किसी को भी नीचा दिखाएँ या उसकी हँसी उड़ाएँ। कहने का तात्पर्य यह हैकि अगर आपके सामने आपका मित्र है तो कभी भी मज़ाक में भी ऐसी बात न कहें , जिससे कि आपका मित्र लज्जित हो और दुःखी होकर आपसे दूर हो जाए क्योंकि सच्चा दोस्त मुश्किल से मिलता है,इसीलिए कहा गया है कि दोस्त अनमोल है। दोस्त को अनमोल इसलिए कहा भी कहा गया है क्योंकि सच्चा दोस्त हमारी अच्छाइयों के बदले कमाया हुआ ईश्वरीय फल है जिसे किसी भी कीमत में आंका नहीं जा सकता,सम्पत्ति,या कोई भी लौकिक वस्तु ख़रीदी या बेची जा सकती है।सच्चा दोस्त कमाने में एक ज़िंदगी भी छोटी पड़ सकती है,परन्तु दोस्त को रुष्ट करने में माथे पर आया नाख़ुशी का एक बल ही काफी है। इसलिए ध्यान में रखना अत्...